रेशम का रेशा तब बनता है जब किसान कोकून पाले और बजट समय पर खेत तक जाए। 11 अगस्त 2026 को मंत्रालय में राज्यमंत्री दिलीप जायसवाल ने रेशम संचालनालय की समीक्षा की और कहा, विभाग के बजट का समुचित उपयोग नहीं हो पाया। शत-प्रतिशत सदुपयोग होना चाहिए। यह नाराजगी ईमानदार पंक्ति है। तंतु इसे छुपाता नहीं।
निर्देश दो हैं। एक, सभी जिलों में रेशम खेती के लिए किसानों को प्रोत्साहित करो। दो, जहाँ खेती नहीं हो रही, 50-50 किसानों को चिन्हित कर पायलट चलाओ। पदोन्नति मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की मंशा के अनुसार शीघ्र हो। अपर मुख्य सचिव के.सी. गुप्ता और संचालनालय अधिकारी बैठे। संचालनालय ने उपलब्धियाँ और आगामी दो वर्ष का रोडमैप रखा। कितनी उपलब्धियाँ, कितना रोडमैप—विज्ञप्ति सूची नहीं छापती।
यह नकारात्मक खबर क्यों?
सकारात्मक कोण यही है कि मंत्री ने अधूरे खर्च को सार्वजनिक किया और पायलट का आँकड़ा दिया। छिपाना प्रचार होता। तंतु लिखता है: बजट का न खपना समस्या मानी गई, समाधान निर्देश है, खेत की पैदावार उस दिन नहीं नापी गई।
तस्वीर कमरे की
लकड़ी की मेज, पानी की बोतलें, फाइलें, छह अधिकारी। कोकून, शहतूत या रीलिंग मशीन नहीं। समीक्षा का चित्र है।
मुख्य बातें
- नाराजगी अधूरे बजट उपयोग पर है; कितना बजट बचा, आँकड़ा विज्ञप्ति में नहीं।
- पायलट: रेशम-विहीन जिलों में 50 किसान चिन्हित करने का निर्देश, पूरा रोपण नहीं।
- संचालनालय ने उपलब्धियाँ और दो वर्ष का रोडमैप रखा; विवरण सार्वजनिक तालिका में नहीं छपा।
स्रोत और संदर्भ
- मध्य प्रदेश जनसंपर्क · राज्य मंत्री जायसवाल ने बजट का समुचित उपयोग नहीं करने पर नाराजगी व्यक्त की ↗11 अगस्त 2026
सार्वजनिक प्राथमिक स्रोतों पर आधारित संपादित लेख। स्रोत जाँच: 17 सितंबर 2026।



